नमस्कार दोस्तों आज थ अवेयर पोस्ट में आज हम बात करेंगे उस 14 घंटे की जिसमे एक पार्टी भी होती हे और मौत भी जिसने एक परिवार से उसका सहारा ...
नमस्कार दोस्तों आज थ अवेयर पोस्ट में आज हम बात करेंगे उस 14 घंटे की जिसमे एक पार्टी भी होती हे और मौत भी
जिसने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया
अमूमन अगर हम बातें करतें हैं किसी परिवार के सहारे की
तो हम सभी के दिमाग में लड़को का ख्याल जरुर आता है l
लेकिन क्या हो अगर एक लड़की अपने परिवार का सहारा बन कर खड़ी हो जाए
और 14 घंटे में वो सबकुछ बदल जाए जो एक परिवार सपनों में भी कभी सोचा न हो
दिल्ली के कंझावला केस में अंजलि 31 दिसंबर की रात कब घर से निकली और कब कैसे उसकी मौत हुई
ये काफी हद तक हम सभी जान चुके हैं
लेकिन अंजलि की मौत के जिम्मेदार वो अपराधी आखिर उस रात कब घर से निकले.
कहां-कहां घूमे और कैसे इस वारदात को अंजाम दिया. आज क्राइम Story में जानते हैं अंजलि की मौत के कातिल किरदारों की पूरी कहानी.
अंजलि की मौत की कहानी के पहले चार किरदार।
पहला 25 साल का अमित खन्ना जो उत्तम नगर में एसबीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग में काम करता है।
दूसरा 27 साल का कृष्ण जो कनॉट प्लेस में स्पेनिश कल्चर सेंटर में काम करता है।
तीसरा 26 साल का मिथुन जो पेशे से हेयर ड्रेसर है।
और चौथा 27 साल का मनोज मित्तल जिसकी सुलतानपुरी में राशन की दुकान है और साथ ही इलाके का बीजेपी नेता है।
चारों 31 दसंबर की शाम मुरथल में न्यू ईयर का जश्न मनाने का फैसला करते हैं।
इसी के बाद अमित, कृष्ण और मिथुन शाम करीब 6 बजे अपने अपने घर से सुल्तानपुरी में मनोज मित्तल की राशन की दुकान में पहुंचते हैं।
दुकान बंद हो चुकी थी इसके बाद चारों उसी दुकान में शराब पीते हैं।
शराब का ये दौर रात करीब 10 बजे तक चलता है।
रात करीब साढ़े 10 बजे के आसपास कहानी में पांचवें किरदार की एंट्री होती है। इस किरदार का नाम है आशुतोष।
नोएडा की एक टेक फर्म में काम करने वाले आशुतोष से अमित की दोस्ती थी।
अमित शराब पीने के बाद आशुतोष से मुरथल जाने के लिए उसकी मारुति बलेनो कार मांगने उसके घर जाता है।
ये कार दरअसल आशुतोष की भी नहीं थी। कार का असली मालिक लोकेश है।
आशुतोष उसी कार मालिक लोकेश का साला है।
मगर लोकेश की ये कार कुछ दिनों से आशुतोष के पास थी।
अमित कार लेकर मनोज मित्तल की राशन की उसी दुकान में पहुंचता है जहां सब शाम से शराब पी रहे थे।
इसके बाद रात करीब साढ़े 10 से पौने 11 बजे के बीच अब चारों सुलतानपुरी से मुरथल के लिए निकल पड़ते हैं।
सुल्तानपुरी से मुरथल तक कार अमित चला रहा था। मुरथल जाने के रास्ते में भी चारों शराब पीते हैं।
मुरथल पहुंचने के बाद चारों एक ढाबा में खाना खाते हैं।
2022 की आखिरी रात को विदाई चारों ने मुरथल में ही दी थी।
अब 2023 शुरू हो चुका था।
चारों खाना खाने के बाद मुरथल से देर रात वापस सुलतानपुरी के लिए निकल पड़ते हैं।
वापसी में भी कार अमित ही चला रह था।
उधर
दूसरी तरफ अंजलि भी 31 दिसंबर की रात अपनी दोस्त निधि के साथ न्यू ईयर की
पार्टी मनाने अपनी स्कूटी से शाम साढ़े छह बजे से निकलती है।
निधि को उसके घर से लेती है और फिर दोनों विवान होटल पहुंचते हैं।
तब घड़ी में शाम के साढ़े सात बजे थे।
साढ़े सात बजे से लेकर डेढ़ बजे तक निधि और अंजलि होटल में ही रहते हैं।
फिर दोनों रात डेढ़ बजे स्कूटी से घर के लिए निकल पड़ते हैं।
अब रात के करीब पौने दो बजे का वक्त रहा होगा।
मुरथल से मारुती बलेनो कार में लौट रहे अमित, मिथुन, कृष्ण और मनोज मित्तल
की गाड़ी ठीक उसी रूट पर थी जिस रूट से अंजलि और निधि स्कूटी पर घर लौट
रहे थे।
दोनों आमने सामने से आ रह थे।
एक जगह सड़क तंग थी।
उसी तंग सड़क पर अचानक मारुति बलेनो कार जुपिटर स्कूटी की आमने-सामने से टक्कर हो जाती है।
टक्कर होते ही अंजलि और निधि स्कूटी से सड़क पर गिर पड़ती हैं।
निधि कार की दाईं तरफ गिरती है जबकि अंजलि कार की बाईं तरफ।
हादसा होते ही कार में सवार लोगों को पता चल चुका था।
उन्हें ये भी अहसास हो गया था कि एक लड़की कार के नीचे फंस गई है।
अंजलि के एक पैर का निचला हिस्सा पहिए में जा फंसा था।
मगर
चारों पहले से ही नशे में थे। सड़क तंग थी। आगे जाने की बजाए उन्होंने
उलटे कार को रिवर्स में डाला और फिर उलटी तरफ कार को भगा कर ले गए।
अब वो कार को सुलतानपुरी-लाडोपुर कट से होते हुए कंझावला मोड़ की तरफ ले जा रहे थे।
उन्हें पता था कि उनसे एक हादसा हो चुका है।
इसलिए डर के मारे अब वो जानबूझ कर ऐसी सड़क पर कार दौड़ा रहे थे
जिस पर कोई पुलिस चौकी या नाका ना हो।
दिल्ली-हरियाणा सीमा पर चेक पोस्ट है।
उन्होंने उस रास्ते को भी अब जानबूझ कर क्रास नहीं किया।
चारों तड़के करीब तीन बजे कंझावला मोड़ पहुंच चुके थे।
इस दौरान वो लगातार कार, सर्किल, छोटे-छोटे कट, मोड़ मेन रोड से हट कर अपनी कार चला रहे थे
ताकि पुलिस वालों से बच सकें।
बाद में अंजलि की लाश कार से अलग होकर सड़क पर जा गिरती है।
इसके करीब दस मिनट बाद यानी चार बज कर दस मिनट पर लाश की सूचना पुलिस को मिलती है।
हादसे के बाद चारों घबराए हुए थे।
एक तो चारों ने शराब पी रखी थी।
ऊपर से अमित जो कार चला रहा था उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।
मित्तल, मिथुन और कृष्ण के पास भी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं थी।
चारों को पता था कि देर सवेर पुलिस कार का पता लगा लेगी।
उन्हें ये भी पता था कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस के कार चलाने और एक्सीडेंट करने पर ज्यादा सजा होगी।
इसी मोड़ पर अब कहानी में छठवें किरदार की एंट्री होती है। छठा किरदार अंकुश। अमित का भाई।
चारों सुलतानपुरी पहुंचने के बाद सबसे पहले अंकुश से मिलते हैं।
उसे सारी बात बताते है।
तब अंकुश अमित को एक आइडिया देता है।
और इस आइडिए के साथ ही कहानी में सातवें किरदार की एंट्री होती है।
सातवां किरदार अमित और अंकुश का कज़न दीपक।
अंकुश
ने ही अपने भाई अमित को सलाह दी कि वो दीपक से संपर्क करे और उसे इस बात
पर राज़ी कर ले कि हादसे के वक्त कार दीपक चला रहा था।
दरअसल दीपक इलकौता था जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस है।
दीपक ग्रामीण सेवा की गाड़ी चलाने का काम करता है। यानी पेशे से ड्राइवर है।
दीपक को लगा कि मामूली एक्सीडेंट है।
इसलिए वो अपने कजन की मदद करने को तैयार हो गया।
इसके बाद चारों कार को सीधे सुलतानपुरी ले जाते हैं।
तड़के 4 बजकर 40 मिनट पर अमित कार आशुतोष के घर के बाहर पार्क कर देता है।
अमित आशुतोष को हादसे के बारे में सच-सच बता देता है।
शक है कि इसके बाद आशुतोष ने कार से खून के निशान मिटाने की कोशिश की।
इसके बाद अमित, मनोज मित्तल, कृष्ण और मिथुन ऑटो पकड़ कर अपने-अपने घर चले जाते हैं।
ये पूरा वाकया एक सीसीटीवी में कैद भी हुआ है.
जब चारों ऑटो पर सुलतानपुरी से अपने घर जा रहे हैं।
चारों सुबह सुबह करीब पांच बजे अपने-अपने घर पहुंचते हैं।
लेकिन तब तक पुलिस को हादसे की खबर मिल चुकी थी।
कार और कार का नंबर सीटीवी कैमरे से मिल चुका था।
इसी के बाद सुबह करीब आठ बजे सभी को पुलिस उनके घरों से गिरफ्तार कर लेती है।
इनमें वो दीपक भी था।
बाद में पांचों पुलिस को यही बयान देते हैं कि दीपक कार चला रहा था
और नशे की हालत में उनसे ये हादसा हो गया।
पुलिस भी उनके बयान को सच मान लेती है।
मगर बाद में जब अंजलि केस को लेकर लोगों का गुस्सा फूटता है और मीडिया में खबरें हेडलाइंस बन जाती हैं
तब पुलिस हरकत में आती है।
इसी दौरान पुलिस जब कार ड्राइवर दीपक से सख्ती से पूछताछ करती है तब दीपक टूट जाता है।
उसे वैसे भी पहले से नहीं पता था कि हादसा किस तरह का हुआ है।
उसने इसे एक मामूली हादसा माना था।
मगर जब उसे पता चला कि कार में फंस कर एक लड़की की मौत हो चुकी है
तब उसने पुलिस को सच बता दिया कि कार मैं नहीं बल्कि अमित चला रहा था।
दीपक के इस बयान के बाद पुलिस अब उसकी कॉल डिटेल खंगालती है।
तब पता चलता है कि 31 दिसंबर की रात 11 बजे से लेकर एक जनवरी की सुबह तक
दीपक के मोबाइल का लोकेशन उसका अपना घर था।
जबकि इसी दौरान अमित, मिथुन, कृष्ण और मनोज मित्तल की लोकेशन मुरथल से लेकर सुलतानपुरी दिखा था।
यानी ये साफ हो गया कि हादसे के वक्त दीपक कार में नहीं बल्कि अपने पर घर था।
और इसी इलैक्ट्रानिक एविडेंस की बात गुरूवार को स्पेशल कमिश्नर कर रहे थे।
यानी दीपक के बयान और हादसे के चार दिन बाद पुलिस को पता चला कि कार में पांच लोग नहीं, बल्कि चार लोग थे।
और कार दीपक नहीं अमित चला रहा था।
दीपक की एक पड़ोसी ने भी इस बात की तसदीक की कि 31 दिसंबर की रात करीब पौने ग्यारह बजे दीपक घऱ लौट आया था।
इसके बाद वो घर पर ही था।
फिर तड़के करीब साढ़े 3 बजे कुछ लोग आए और दीपक को अपने साथ ले गए।
यानी तड़के दीपक को जगा कर ले जाने वाले कोई और नहीं बल्कि उनका कजन अमित, मनोज मित्तल, मिथुन, और कृष्ण थे।
तो ये रही 31 दिसंबर की शाम छह बजे से लेकर एक जनवरी की सुबह आठ बजे तक कि वो पूरी कहानी जिसमें कहानी का हर सच कैद है।
यानी इन्हीं 14 घंटों की कहानी की हर कड़ी को पुलिस जोड़़ ले तो केस आइने की तरह साफ हो जाए।
मगर अफसोस की ये बात है कि पुलिस ने हादसे वाली पहली सुबह से ही गलतियां पर गलितियां करनी शुरू कर दी।
जिसका नतीजा ये रहा कि 35 घंटे बाद अचानक स्कूटी एक की जगह दो लोग सवार हो गए।
यानी अंजलि के बाद निधि की एंट्री हो गई।
फिर चार दिन बाद अचानक कार का ड्राइवर बदल गया।
और पांचवें दिन कार में सवार लोगों की गिनती कम हो गई।
पता चला कि कार में पांच नहीं बल्कि सिर्फ चार लोग सवार थे।
इस बीच आजतक की टीम ने अंजलि के उस दोस्त को भी ढूंढ निकाला जो 31 दिसंबर की शाम उसके साथ था।
सुनिए उस शाम और रात के बारे में अंजलि के दोस्त का क्या कहना है।
छह भाई बहनों में घर की दूसरी सबसे बड़ी बेटी अंजलि उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के मंगलोपुरी के इस छोटे से घर में रहा करती थी।
पिता की मौत आठ साल पहले हो चुकी है।
बड़ी बहन की शादी हो चुकी है और वो अपने पति के साथ ससुराल में रहती है।
बाकी सभी भाई-बहन अंजलि से छोटे हैं।
मां एक स्कूल में सहायक की नौकरी किया करती थी।
मगर कोरोना के दौरान में लॉकडाउन में नौकरी चली गई।
घर का खाना सरकारी स्कीम के तहत आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों को सरकारी स्कीम के तहत दिए जाने वाले मासिक अनाज से मिलता था।
घर के खर्च की सारी जिम्मेदारी अंजलि पर आ गई थी।
अंजलि ने मोहल्ले में ब्यूटीशियन का कोर्स किया था।
वो मोहल्ले में शादी-ब्याह या दूसरे फंक्शन में महिलाओं और लड़कियों की मेकअप कर पैसे कमाती थी।
घर का खर्च चलाने के लिए पार्ट टाइम शादियों में मेहमानों का स्वागत करने और उनपर फूल बरसाने का काम भी अंजलि ने किया।
जिस जुपिटर स्कूटी को कार ने टक्कर मारी वो स्कूटी अंजलि ने करीब पांच साल किश्तों पर ली थी।
स्कूटी की आखिरी किश्त अब बस खत्म ही होने वाली थी।
मगर किश्त खत्म होने से पहले खुद अंजलि की सांसें छीन ली गईं।



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